जनकपुरी में अव्यस्थाएं भी नजर आईं। राजा दशरथ बने छोटेलाल बंसल और रानी कौशल्या बनी उनकी पत्नी कांता बंसल आज जनक महल के मंच पर नहीं पहुंचे। रात करीब पौने दस बजे जिलाधिकारी भानु चंद्र गोस्वामी जनक महल के आगे पहुंचे, लेकिन दूसरे कार्यों में व्यस्त जनकपुरी महोत्सव समिति के पदाधिकारी उन्हें नहीं देख पाए। एक महिला दरोगा ने मंच पर लगभग दौड़ते हुए संचालक और अन्य को इसकी जानकारी दी। सभी पदाधिकारी दौड़ कर राजा जनक पीएल शर्मा के पास पहुंचे और राजा जनक को साथ लेकर जिलाधिकारी का मंच पर स्वागत किया गया। परंपरागत रूप से स्वरूपों की मंच पर दो ही आरती होती हैं, एक आगमन पर और दूसरी प्रस्थान से पूर्व, लेकिन जिलाधिकारी से भी बीच में एक बार और आरती कराई गई। मंच संचालक ने कई बार माइक से राजा दशरथ और रानी कौशल्या को पुकारा, लेकिन वे नहीं पहुंचे।
मंच के आगे बनी दर्शक दीर्घा में भी काफी अव्यवस्था रही। रामलीला कमेटी के पदाधिकारियों के लिए बनाई गई दर्शक दीर्घा में गुलाबी परिधान धारण किए जनकपुरी की महिलाओं और उनके परिवार ने कब्जा कर रखा था। जनकपुरी समिति के पदाधिकारियों से इन महिलाओं को अन्य स्थान देने के लिए कहा गया, लेकिन सभी ने हाथ खड़े कर दिए। नतीजतन रामलीला कमेटी के कई पदाधिकारी या तो पूरे समय खड़े रहे या फिर वहां से चले गए।
दर्शक दीर्घा पर आज पुलिसकर्मियों के परिवारों का कब्जा था। प्रवेश द्वारों पर खड़े पुलिसकर्मियों ने कई पासधारकों के पास फाड़ दिए और उन्हें प्रवेश नहीं दिया, वहीं अपने व परिचितों के परिवारों को बिना पास के ही दर्शक दीर्घा में बिठा दिया।
रूठ गए जनकपुरी के संरक्षक दयाशंकर शर्मा
जनकपुरी महोत्सव समिति के संरक्षक दयाशंकर शर्मा आज रात्रि रूठ गए और अपना बैज-पास वापस कर आयोजन के बीच में ही वहां से चले गए। उनकी सह मीडिया प्रभारी अनिल रावत से कहासुनी भी हुई। उपाध्यक्ष विनय मित्तल ने मामले को साधने का प्रयास किया, लेकिन बात नहीं बनी। विनय मित्तल ने बताया कि दयाशंकर शर्मा मंच पर जाना चाहते थे, जबकि स्वरूपों के दर्शन जनता को कराने के लिए आज मंच पर जाने वालों के प्रति सख्ती थी। दूसरी ओर दयाशंकर शर्मा ने आरोप लगाया कि सख्ती के नाम पर कुछ लोगों को रोका गया तो कुछ लोगों के प्रति नरमी बरती गई।
रूठ गए जनकपुरी के संरक्षक दयाशंकर शर्मा
जनकपुरी महोत्सव समिति के संरक्षक दयाशंकर शर्मा आज रात्रि रूठ गए और अपना बैज-पास वापस कर आयोजन के बीच में ही वहां से चले गए। उनकी सह मीडिया प्रभारी अनिल रावत से कहासुनी भी हुई। उपाध्यक्ष विनय मित्तल ने मामले को साधने का प्रयास किया, लेकिन बात नहीं बनी। विनय मित्तल ने बताया कि दयाशंकर शर्मा मंच पर जाना चाहते थे, जबकि स्वरूपों के दर्शन जनता को कराने के लिए आज मंच पर जाने वालों के प्रति सख्ती थी। दूसरी ओर दयाशंकर शर्मा ने आरोप लगाया कि सख्ती के नाम पर कुछ लोगों को रोका गया तो कुछ लोगों के प्रति नरमी बरती गई।
अग्रवाल युवा संगठन ने सम्भाल रखी थी 10 और 11 Oct कि सुरक्षा व्यवस्था, लेकिन पुलिस प्रशासन द्वारा किया गया अभद्र व्यवहार, संगठन के सदस्यों को नहीं जाने दिया जनक महल के अंदर, नौबत यहा तक आ गयी की पुलिस ने उनके पास तक फाड़ दिए, जनकपुरी समिति ने भी इस पर कोई प्रतिक्रिया नहीं की, हालांकि अग्रवाल युवा संगठन ने खुल कर इस पर नाराजगी व्यक्त नहीं की लेकिन गुरुवार को संगठन के सदस्य भी अनुपस्थित रहे,