हादसे के बाद, पुलिस ने चेकिंग अभियान चलाकर 200 ऑटो रिक्शाओं से अगली सीटें हटवाई

Shivam Garg
0

100 ऑटो के चालान किए गए और दस को सीज कर दिया


आगरा, 03 दिसम्बर। दिल्ली नेशनल हाईवे पर हुए हादसे के बाद पुलिस ने ताबड़तोड़ चेकिंग अभियान चलाकर 200 ऑटो रिक्शाओं से अगली सीटें हटवाई। सौ ऑटो के चालान किए गए और दस को सीज कर दिया गया। इस सबके बावजूद तमाम ऑटो रिक्शा वाले नियम से अधिक सवारियां बैठाते नजर आए।

ऑटो रिक्शा में पिछली सीट पर तीन और अधिकतम चार सवारियां ही बैठ सकती हैं, लेकिन शहर में दौड़ने वाले अधिकांश ऑटो में आगे अतिरिक्त सीटें लगा रखी हैं, जिन पर तीन सवारी अतिरिक्त बैठाते हैं। इस तरह आटो में आठ सवारियां ढोते हैं। शनिवार को गुरु का ताल पर जो ऑटो हादसे का शिकार हुआ उसमें भी पांच सवारियां थीं। चालक सहित छह की मौत के बाद पुलिस जागी।

भगवान टॉकीज, वाटर वर्क्स और रामबाग चौराहे पर अभियान चलाया गया। चंद घंटे में 200 ऑटो ऐसे मिल गए जिनमें आगे भी सवारियां बैठी थीं। पुलिस ने आगे सिर्फ चालक की सीट छोड़ी। उसके अलावा लगवाई गईं सीटें निकलवा दीं। अपर पुलिस उपायुक्त अरुण चंद्र ने बताया कि अभियान लगातार चलाया जाएगा।

लेकिन रविवार को अनेक मार्गों पर ऑटो चालकों को बेतरतीब तरीके से सवारियां बैठाते देखा गया। रामबाग चौराहे पर सुबह 10 बजे पुलिस की आंखों के सामने ही ऑटो और डग्गामार वाहनों में मनमाने तरीके से सवारी बैठाई जा रही थी। सब कुछ पहले जैसे ही चल रहा था। ऑटो में आगे तीन और पीछे चार सवारी बैठी थीं। मैजिक ऑटो में ड्राइवर ने अपने बराबर में चार लोगों को और पीछे 12 सवारी बैठा रखी थीं। कई ऑटो में तो सवारी पीछे लटकी हुई थीं। ये हालात तब हैं, जब चौराहे पर पुलिस चौकी है।

मंडी समिति से लेकर रूनकता तक रामबाग, वाटर वर्क्स, सुल्तानगंज पुलिया, भगवान टाकीज, खंदारी, आईएसबीटी, गुरुद्वारा गुरु का ताल, सिकंदरा, सब्जी मंडी समेत एक दर्जन से अधिक चौराहों पर पुलिस की तैनाती रहती है। इसके बावजूद हर चौराहे पर आटो और डग्गामार वाहन सड़क घेरकर सवारी भरते हैं और पुलिस की आंखों के सामने ओवरलोड होने के साथ जाम का कारण भी बनते हैं। सड़क पर पैदल खड़ा हर व्यक्ति इन्हें सवारी नजर आता है। पीछे से आ रहे वाहनों को देखे बिना ही इनका हैंडल सवारी की ओर मुड़ जाता है अब पीछे वाला अगर खुद ब्रेक लगा ले तो ठीक वरना अगर हादसा हुआ तो कुछ ही देर में इनके साथी चालक इकट्ठा हो जाते हैं और उल्टा पीड़ित से ही वसूली की जाती है।

Post a Comment

0Comments
Post a Comment (0)