जब सहवाजपुर गांव के युवक कमल सिंह और दिनेश ने उन्हें ट्यूब पर बैठाकर गंगा से बाहर निकाला तो वो पल पूरन सिंह के लिए बेहद चौंकाने वाले थे। पूरन सिंह को यह भरोसा नहीं हो रहा था कि कि वो जीवन की जंग जीत चुके हैं। पूरन सिंह पानी से भीगे होने और जीवन का संघर्ष करते-करते काफी थक चुके थे। बाहर आते ही वो बदहवास हो गए। गांव के लोगों ने उन्हें पहनने को कपड़े दिए। चाय आदि पिलाई। इसके बाद उन्हें आराम कराया। इसके बाद उन्हें कुछ राहत मिली। कुछ राह होने पर उन्होंने लोगों को आपी बीती और उठाईगीरों की करतूत के बारे में बताया। उन्होंने जीवन बचाने के लिए गंगा मईया और भगवान का शुक्रिया अदा किया। मौके पर पहुंचे बेटे अजय सिंह ने कहा कि उन्हें किसी से कोई गिला शिकवा नहीं है। उनके पिता की जान बच गई। वह कोई कार्रवाई नहीं चाहते। ईश्वर का शुक्र है।
पूरन की आपबीत सुनकर हैरत में थे ग्रामीण, मदद को आगे आए
ग्रामीणों को जब श्रद्धालु पूरन सिंह के घटनाक्रम की जानकारी हुई तो गांव के लोगों की भीड़ मौके पर एकत्र हो गई। ग्रामीण पूरन सिंह के प्रति सहानुभूति दिखाते हुए उनकी मदद करने लगे। लोग इस बात को लेकर हैरत में थे कि कैसे उन्होंने गंगा में रहकर जान बचाई। क्योंकि गंगा में मगरमच्छ होते हैं। जिनके हमले का भी खतरा था। ग्रामीणों ने उन्हें चाय पिलाई, नाश्ता कराया। पूर्व प्रधान विजय सिंह ने कपड़े लुंगी पूरन सिंह को दिया।
Source: Amar Ujala